खण्‍डवा नगर

दिशा

 खंडवा शहर को जिला पूर्व निमाड़ का  जिले का मुख्‍यालय होने का गौरव प्राप्त है। भारत के नक्शे पर इसकी लगभग मध्‍य में स्थिति के कारण  अतीत में (ब्रिटिश काल में), यह उत्तरी, पूर्वी, दक्षिणी और पश्चिमी रेल मार्गों को जोड़ने वाली एक जगह थी। दिल्‍ली (उत्तर), बॉम्बे (दक्षिण) और बड़ौदा (पश्चिम) सीधे जुड़ा हुआ था जबकि कलकत्ता  भुसावल जंक्शन के माध्यम से पहुँचा जा सकता है। इसलिए स्वामी दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक और कई अन्य महान हस्तियों ने  अपनी  भारतयात्रा के समय  स्थान का दौरा किया। । भौगोलिक स्थिति , संसाधनों की आसान उपलब्धता और अन्य सामाजिक-आर्थिक कारक इस जगह को बहुत अच्छा औद्योगिक क्षेत्र बना सकते हैं ।  इस स्थान में कई प्राचीन कुंड, अंग्रेजी वास्तुकला और धार्मिक स्थान हैं।

यह स्थान बंबई-दिल्ली केंद्रीय लाइन और बुरहानपुर के उत्तर में स्थित है। यह स्थान 1864 से जिला मुख्‍यालय रहा है ।  इस स्थान पर चार ऐतिहासिक कुंड हैं, जिनमें सूरज कुंड, पद्म कुंड, भीम कुंड, रामेश्वर कुंड शामिल हैं। कलेक्टर कार्यालय, गर्ल्स डिग्री कॉलेज, घंटाघर की इमारतें प्राचीन स्मारकों में से हैं। दादा धुनी वाले की समाधि, तुरजा भवानी मंदिर, नव-चंडी देवी धाम हिंदुओं की आस्था और पूजा स्थल हैं। पार्श्‍वगायक किशोर कुमार की समाधि भी खण्‍डवा में ही है । 

जिले के नजदीकी पर्यटन स्‍थलों मेंंओंकारेश्‍वर और इंदिरा सागर पर्यटक परिसर, हनुवंतिया है ।  

फोटो गैलरी

  • तुरजा भवानी
  • नवचण्‍डी मंदिर
  • नागचून तालाब

कैसे पहुंचें:

बाय एयर

समीपस्‍थ हवाई अड्डा 140 किमी दूरी पर इंदौर में है ।

ट्रेन द्वारा

खंडवा जंक्शन मुंबई-भुसावल-इटारसी-दिल्ली मार्ग पर है। भोपाल से यह लगभग 280 किमी दूर है, दिल्ली और मुंबई से क्रमशः, लगभग दूरी एक हजार किमी दूर, छह सौ किमी है।

सड़क के द्वारा

इंदौर नगर से खण्‍डवा सड़क मार्ग से लगभग 140 किमी है । भोपाल से व्‍हाया होशंगाबाद 280 किमी है , आष्‍टा- पुनासा होते हुए 260 किमी है और भोपाल से इंदौर होते हुए भी आ सकते हैं । गुजरात के बड़ौदा और महाराष्‍ट्र के अमरावती से भी खण्‍डवा जुड़ा हुआ है ।